Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.57.37-38: तत्पश्चात् हनुमान जी महेन्द्रगिरि के सुन्दर वन प्रदेश में वालिकुमार अंगद का हाथ हाथ में लेकर बैठ गये और सबसे पूछकर उन वानर सरदारों से इस प्रकार बोले - 'जनकनन्दिनी सीता लंका के अशोक वन में निवास करती हैं। वहीं मैंने उन्हें देखा था।   |   ramayan सर्ग 5.57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  5.57.37-38 
निषसाद च हस्तेन गृहीत्वा वालिन: सुतम्।
रमणीये वनोद्देशे महेन्द्रस्य गिरेस्तदा॥ ३७॥
हनूमानब्रवीत् पृष्टस्तदा तान् वानरर्षभान्।
अशोकवनिकासंस्था दृष्टा सा जनकात्मजा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् हनुमान जी महेन्द्रगिरि के सुन्दर वन प्रदेश में वालिकुमार अंगद का हाथ हाथ में लेकर बैठ गये और सबसे पूछकर उन वानर सरदारों से इस प्रकार बोले - 'जनकनन्दिनी सीता लंका के अशोक वन में निवास करती हैं। वहीं मैंने उन्हें देखा था।
 
Thereafter, Hanuman ji sat in the beautiful forest region of Mahendragiri, taking Valikumar Angad's hand in his hand and after asking everyone, he spoke to those monkey chieftains like this - 'Janakandini Sita resides in the Ashoka forest of Lanka. That's where I saw him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)