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ramayan 5.57.35: महाकपि हनुमान जी ने जाम्बवान और कुमार अंगद जैसे पुराने गुरुओं को प्रणाम किया। 35॥   |   ramayan सर्ग 5.57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.57.35 
हनूमांस्तु गुरून् वृद्धाञ्जाम्बवत्प्रमुखांस्तदा।
कुमारमङ्गदं चैव सोऽवन्दत महाकपि:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
महाकपि हनुमान जी ने जाम्बवान और कुमार अंगद जैसे पुराने गुरुओं को प्रणाम किया। 35॥
 
Mahakapi Hanuman ji saluted the old teachers like Jambavan and Kumar Angad. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)