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ramayan 5.57.29: तत्पश्चात् पर्वत के समान विशाल शरीर वाले वीर वानर हनुमानजी, जो अरिष्टा पर्वत से कूदकर वृक्षों से भरे हुए महेन्द्र पर्वत के शिखर पर चढ़ गए थे, उस पर कूद पड़े।   |   ramayan सर्ग 5.57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.57.29 
ततस्तु वेगवान् वीरो गिरेर्गिरिनिभ: कपि:।
निपपात गिरेस्तस्य शिखरे पादपाकुले॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पर्वत के समान विशाल शरीर वाले वीर वानर हनुमानजी, जो अरिष्टा पर्वत से कूदकर वृक्षों से भरे हुए महेन्द्र पर्वत के शिखर पर चढ़ गए थे, उस पर कूद पड़े।
 
After that, Hanuman, the brave monkey with a body as big as a mountain, who had jumped from Arishta mountain and jumped on the peak of Mahendra mountain full of trees, jumped on it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)