श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.57.23 
सर्वथा कृतकार्योऽसौ हनूमान् नात्र संशय:।
न ह्यस्याकृतकार्यस्य नाद एवंविधो भवेत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि हनुमानजी सब प्रकार से अपना कार्य सिद्ध करके आ रहे हैं। जब तक उनका कार्य सिद्ध न हो जाए, वे इस प्रकार गर्जना नहीं कर सकते॥ 23॥
 
‘There is no doubt that Hanumanji is coming after having accomplished his task in every way. He cannot roar like this unless his task is accomplished.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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