श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.57.21 
निशम्य नदतो नादं वानरास्ते समन्तत:।
बभूवुरुत्सुका: सर्वे सुहृद्दर्शनकाङ्क्षिण:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पवनकुमार की सिंहनाद भरी गर्जना सुनकर सब ओर बैठे हुए सभी वानर अपने प्रिय हनुमान् जी के दर्शन की इच्छा से आतुर हो गए॥21॥
 
Hearing the roaring roar of Pawankumar's lion, all the monkeys sitting everywhere became eager with the desire to see their beloved Hanuman ji. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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