श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.57.20 
ते दीनमनस: सर्वे शुश्रुवु: काननौकस:।
वानरेन्द्रस्य निर्घोषं पर्जन्यनिनदोपमम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
किसी विपत्ति के भय से दीनता से भरे हुए हृदय वाले समस्त वनवासी वानरों ने वानरश्रेष्ठ हनुमानजी की बादलों की गर्जना के समान गर्जना सुनी।
 
All the forest-dwelling monkeys, whose hearts were filled with humility due to the fear of some misfortune, heard the roar of that best of monkeys, Hanuman, which was like the roar of the clouds.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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