Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.57.17-18h: जिस मार्ग पर गरुड़ चलते हैं, उसी मार्ग पर बार-बार गर्जना करते हुए हनुमानजी की गम्भीर गर्जना से ऐसा प्रतीत होता था मानो सूर्य सहित आकाश फट रहा हो। 17 1/2 | ramayan सर्ग 5.57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिस मार्ग पर गरुड़ चलते हैं, उसी मार्ग पर बार-बार गर्जना करते हुए हनुमानजी की गम्भीर गर्जना से ऐसा प्रतीत होता था मानो सूर्य सहित आकाश फट रहा हो। 17 1/2
On the same path where Garuda walks, it seemed as if the sky, including the sun, was being torn apart by the deep roar of Hanumanji while he was roaring repeatedly. 17 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥