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ramayan 5.57.16-17h: फिर, अपने मित्रों को देखने के लिए उत्सुक होकर, वह उनके विश्राम स्थल की ओर बढ़ा और अपनी पूँछ हिलाने तथा जोर से दहाड़ने लगा। 16 1/2   |   ramayan सर्ग 5.57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  5.57.16-17h 
स तं देशमनुप्राप्त: सुहृद्दर्शनलालस:॥ १६॥
ननाद सुमहानादं लाङ्गूलं चाप्यकम्पयत्।
 
 
अनुवाद
फिर, अपने मित्रों को देखने के लिए उत्सुक होकर, वह उनके विश्राम स्थल की ओर बढ़ा और अपनी पूँछ हिलाने तथा जोर से दहाड़ने लगा। 16 1/2
 
Then, eager to see his friends, he proceeded towards their resting place and began wagging his tail and roaring loudly. 16 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)