Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.57.14-15h: उत्तरी तट के निकट पहुँचकर जब उसे विशाल महेन्द्र पर्वत दिखाई दिया, तो वह महाकपि मेघ के समान जोर से गर्जना करने लगा।   |   ramayan सर्ग 5.57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 57: हनुमान जी का समद्र को लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदों से मिलना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  5.57.14-15h 
स किंचिदारात् सम्प्राप्त: समालोक्य महागिरिम्॥ १४॥
महेन्द्रं मेघसंकाशं ननाद स महाकपि:।
 
 
अनुवाद
उत्तरी तट के निकट पहुँचकर जब उसे विशाल महेन्द्र पर्वत दिखाई दिया, तो वह महाकपि मेघ के समान जोर से गर्जना करने लगा।
 
On reaching near the northern bank and catching sight of the mighty Mahendra mountain, that great ape roared loudly like a cloud. 14 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)