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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना
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श्लोक 51
श्लोक
5.56.51
स लिलङ्घयिषुर्भीमं सलीलं लवणार्णवम्।
कल्लोलास्फालवेलान्तमुत्पपात नभो हरि:॥ ५१॥
अनुवाद
हनुमान उस खारे पानी के भयानक समुद्र को खेल-खेल में पार करने की इच्छा से आकाश में उड़े, जिसकी ऊँची-ऊँची लहरें उठकर उसके किनारों को चूम रही थीं।
Hanuman flew into the sky with the desire to playfully cross that dreadful sea of salty water whose high waves rose and kissed its shores.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे षट्पञ्चाश: सर्ग:॥ ५६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें छप्पनवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ५६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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