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ramayan 5.56.46: वे विद्याधरी जिनके वस्त्र भय के कारण ढीले हो गए थे और आभूषण फट गए थे, वे अचानक उस पर्वत से ऊपर की ओर उड़ चले।   |   ramayan सर्ग 5.56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.56.46 
त्रस्तव्याविद्धवसना व्याकुलीकृतभूषणा:।
विद्याधर्य: समुत्पेतु: सहसा धरणीधरात्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वे विद्याधरी जिनके वस्त्र भय के कारण ढीले हो गए थे और आभूषण फट गए थे, वे अचानक उस पर्वत से ऊपर की ओर उड़ चले।
 
Those Vidyadharis whose clothes had become loose and ornaments were torn apart due to fear, suddenly flew upwards from that mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)