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ramayan 5.56.45: उस समय उस पर्वत की गुफाओं में छिपे हुए पराक्रमी सिंहों की भयानक दहाड़ मानो आकाश को फाड़ रही हो, ऐसी प्रतीत हो रही थी।   |   ramayan सर्ग 5.56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.56.45 
कन्दरोदरसंस्थानां पीडितानां महौजसाम्।
सिंहानां निनदो भीमो नभो भिन्दन् हि शुश्रुवे॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
उस समय उस पर्वत की गुफाओं में छिपे हुए पराक्रमी सिंहों की भयानक दहाड़ मानो आकाश को फाड़ रही हो, ऐसी प्रतीत हो रही थी।
 
At that time, the terrifying roar of the mighty lions hiding in the caves of that mountain seemed as if tearing the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)