स तदा पीडितस्तेन कपिना पर्वतोत्तम:॥ ४२॥
ररास विविधैर्भूतै: प्राविशद् वसुधातलम्।
कम्पमानैश्च शिखरै: पतद्भिरपि च द्रुमै:॥ ४३॥
अनुवाद
हनुमान के पैरों के दबाव से वह महान पर्वत अत्यन्त भयानक ध्वनि करता हुआ अपने हिलते हुए शिखरों, गिरते हुए वृक्षों तथा विविध प्राणियों सहित तुरन्त पृथ्वी में धंस गया।
Due to the pressure of Hanuman's feet, that great mountain made a very terrifying sound and instantly sank into the earth along with its shaking peaks, falling trees and various creatures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥