श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  5.56.40-41h 
अधिरुह्य ततो वीर: पर्वतं पवनात्मज:॥ ४०॥
ददर्श सागरं भीमं भीमोरगनिषेवितम्।
 
 
अनुवाद
उस पर्वत पर चढ़कर वीर पवनकुमार ने भयंकर सर्पों से भरे हुए उस भयंकर समुद्र की ओर देखा ॥40 1/2॥
 
After mounting that mountain, the brave Pawan Kumar looked towards that dreadful ocean filled with terrible snakes. 40 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)