Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.56.35: हर जगह तरह-तरह के जीव-जंतु मौजूद थे। तरह-तरह की धातुओं के पिघलने से उसकी सुंदरता बढ़ रही थी। वह पर्वत असंख्य झरनों से सुशोभित था और ढेर सारी चट्टानों से भरा हुआ था। | ramayan सर्ग 5.56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हर जगह तरह-तरह के जीव-जंतु मौजूद थे। तरह-तरह की धातुओं के पिघलने से उसकी सुंदरता बढ़ रही थी। वह पर्वत असंख्य झरनों से सुशोभित था और ढेर सारी चट्टानों से भरा हुआ था।
Various kinds of animals were present everywhere. The melting of various metals was adding to its beauty. That mountain was adorned with numerous waterfalls and was filled with a lot of rocks. 35.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥