Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.56.29: असंख्य झरनों की कलकल ध्वनि के साथ वह अरिष्टगिरि स्पष्ट रूप से कोई गीत गा रहा था। ऊँचे देवदार वृक्षों के कारण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह हाथ ऊपर उठाए खड़ा हो। 29।   |   ramayan सर्ग 5.56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.56.29 
प्रगीतमिव विस्पष्टं नानाप्रस्रवणस्वनै:।
देवदारुभिरुद्‍धूतैरूर्ध्वबाहुमिव स्थितम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
असंख्य झरनों की कलकल ध्वनि के साथ वह अरिष्टगिरि स्पष्ट रूप से कोई गीत गा रहा था। ऊँचे देवदार वृक्षों के कारण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह हाथ ऊपर उठाए खड़ा हो। 29।
 
With the gurgling sound of the numerous waterfalls, that Arishtagiri was clearly singing a song. Because of the tall deodar trees, it seemed as if it was standing with its hands raised. 29.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)