Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.56.26-27h: कमल के समान ऊँचे वृक्षों से सुशोभित नीली वन-श्रेणियाँ उस पर्वत के वस्त्र के समान थीं। उसकी चोटियों पर लटके हुए काले बादल उसके ऊपरी वस्त्र (चादर) के समान प्रतीत होते थे।॥26 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  5.56.26-27h 
तुङ्गपद्मकजुष्टाभिर्नीलाभिर्वनराजिभि:॥ २६॥
सोत्तरीयमिवाम्भोदै: शृङ्गान्तरविलम्बिभि:।
 
 
अनुवाद
कमल के समान ऊँचे वृक्षों से सुशोभित नीली वन-श्रेणियाँ उस पर्वत के वस्त्र के समान थीं। उसकी चोटियों पर लटके हुए काले बादल उसके ऊपरी वस्त्र (चादर) के समान प्रतीत होते थे।॥26 1/2॥
 
The blue forest ranges adorned with tall lotus-coloured trees were like the clothes of that mountain. The dark clouds hanging on its peaks appeared like its upper garment (sheet).॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)