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ramayan 5.56.22: विदेहनन्दिनी सीता को यह आश्वासन देकर और वहाँ से जाने का विचार करते हुए पवनपुत्र हनुमान ने उन्हें प्रणाम किया।   |   ramayan सर्ग 5.56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.56.22 
एवमाश्वास्य वैदेहीं हनूमान् मारुतात्मज:।
गमनाय मतिं कृत्वा वैदेहीमभ्यवादयत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
विदेहनन्दिनी सीता को यह आश्वासन देकर और वहाँ से जाने का विचार करते हुए पवनपुत्र हनुमान ने उन्हें प्रणाम किया।
 
Having given this assurance to Videhanandini Sita and thinking of leaving the place, Hanuman, son of the wind, bowed to her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)