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ramayan 5.56.18: वररोहे! राक्षसराज रावण को उसके सैनिकों सहित मृत्यु के मुख में डालकर श्री रघुनाथजी तुम्हें साथ लेकर शीघ्र ही अपने नगर को लौट जाएँगे॥ 18॥   |   ramayan सर्ग 5.56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.56.18 
सगणं राक्षसं हत्वा नचिराद् रघुनन्दन:।
त्वामादाय वरारोहे स्वां पुरीं प्रति यास्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वररोहे! राक्षसराज रावण को उसके सैनिकों सहित मृत्यु के मुख में डालकर श्री रघुनाथजी तुम्हें साथ लेकर शीघ्र ही अपने नगर को लौट जाएँगे॥ 18॥
 
Vararohe! After throwing the demon king Ravana along with his soldiers into the jaws of death, Sri Raghunathji will take you along with him and will soon return to his city.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)