श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.56.15 
देवि हर्यृक्षसैन्यानामीश्वर: प्लवतां वर:।
सुग्रीव: सत्त्वसम्पन्नस्तवार्थे कृतनिश्चय:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'देवी! वानरों में श्रेष्ठ तथा वानरों और भालुओं की सेनाओं के स्वामी सुग्रीव अत्यन्त बलवान हैं। उन्होंने आपकी रक्षा करने की प्रतिज्ञा की है॥ 15॥
 
‘Goddess! Sugreeva, the best of the apes and the lord of the armies of the monkeys and bears, is a very powerful man. He has vowed to rescue you.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)