श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.56.14 
तदर्थोपहितं वाक्यं प्रश्रितं हेतुसंहितम्।
निशम्य हनुमान् वीरो वाक्यमुत्तरमब्रवीत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
सीताजी के वचन प्रेम से भरे हुए और विशेष प्रयोजन वाले थे। यह सुनकर वीर हनुमान ने इस प्रकार उत्तर दिया-॥14॥
 
Sitaji's words were full of love and had a special purpose. On hearing this, the brave Hanuman replied in this manner -॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)