श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.56.13 
तद् यथा तस्य विक्रान्तमनुरूपं महात्मन:।
भवत्याहवशूरस्य तथा त्वमुपपादय॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम ऐसे उपाय करो जिससे योद्धा महात्मा श्री रामचन्द्रजी का पराक्रम उनकी क्षमता के अनुसार प्रकट हो सके। ॥13॥
 
"Therefore you should take such measures by which the might of the warrior Mahatma Shri Ramchandraji may be manifested as per his capability." ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)