श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.56.12 
बलैस्तु संकुलां कृत्वा लङ्कां परबलार्दन:।
मां नयेद् यदि काकुत्स्थस्तत् तस्य सदृशं भवेत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
परंतु यदि शत्रु सेना को कष्ट देने वाले भगवान राम अपनी सेना के साथ लंका को रौंदकर मुझे यहाँ से ले जाएँ, तो यह उनके योग्य कार्य होगा॥12॥
 
But if Lord Rama, who is the tormentor of the enemy's army, tramples Lanka with his army and takes me away from here, that would be a feat worthy of him.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)