श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी का पुनः सीताजी से मिलकर लौटना और समुद्र को लाँघना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.56.10 
तदत्र कार्यनिर्बन्धे समुत्पन्ने दुरासदे।
किं पश्यसि समाधानं त्वं हि कार्यविशारद:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इस कठिन कार्य बाधा के सम्मुख आप क्या उपाय देखते हैं? मुझे बताइए, क्योंकि आप कार्य में कुशल हैं॥10॥
 
‘What solution do you see in the face of this difficult obstacle to work? Tell me, because you are skilled in work.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)