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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 55: सीताजी के लिये हनुमान् जी की चिन्ता और उसका निवारण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.55.9 
यदर्थमयमारम्भस्तत्कार्यमवसादितम्।
मया हि दहता लङ्कां न सीता परिरक्षिता॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जिस उद्देश्य के लिए यह सब प्रयास किया गया था, मैंने उसे ही नष्ट कर दिया, क्योंकि लंका दहन के समय मैंने सीता की रक्षा नहीं की।'
 
I ruined the very purpose for which all this effort was made, because I did not protect Sita while Lanka was being burnt.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)