Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.55.34: अनेक बार हुए शुभ शकुनों, महान पुण्यों को बताने वाले कारणों और भाटों के कहे हुए उपर्युक्त वचनों के कारण सीताजी के जीवित होने का निश्चय करके हनुमान्जी बहुत प्रसन्न हुए॥34॥ | ramayan सर्ग 5.55: सीताजी के लिये हनुमान् जी की चिन्ता और उसका निवारण । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स निमित्तैश्च दृष्टार्थै: कारणैश्च महागुणै:।
ऋषिवाक्यैश्च हनुमानभवत् प्रीतमानस:॥ ३४॥
अनुवाद
अनेक बार हुए शुभ शकुनों, महान पुण्यों को बताने वाले कारणों और भाटों के कहे हुए उपर्युक्त वचनों के कारण सीताजी के जीवित होने का निश्चय करके हनुमान्जी बहुत प्रसन्न हुए॥34॥
Hanuman ji felt very happy after deciding that Sitaji would be alive due to the good omens he had experienced many times, the reasons giving great virtues and the above words spoken by the bards. 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥