Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.55.31-32: ‘अपने घर से भागे हुए राक्षसों, स्त्रियों, बालकों और वृद्धों से भरी हुई वह सारी लंका, लोगों के कोलाहल और चीख-पुकार से भरी हुई प्रतीत हो रही थी। पर्वतों की गुफाओं, छतों, प्राचीरों और नगर के द्वारों सहित सारी लंका जल गई; परन्तु सीता को कोई हानि नहीं हुई। यह हमारे लिए बड़ी विचित्र और आश्चर्यजनक बात है।’॥31-32॥ | ramayan सर्ग 5.55: सीताजी के लिये हनुमान् जी की चिन्ता और उसका निवारण । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रपलायितरक्ष:स्त्रीबालवृद्धसमाकुला।
जनकोलाहलाध्माता क्रन्दन्तीवाद्रिकन्दरै:॥ ३१॥
दग्धेयं नगरी लङ्का साट्टप्राकारतोरणा।
जानकी न च दग्धेति विस्मयोऽद्भुत एव न:॥ ३२॥
अनुवाद
‘अपने घर से भागे हुए राक्षसों, स्त्रियों, बालकों और वृद्धों से भरी हुई वह सारी लंका, लोगों के कोलाहल और चीख-पुकार से भरी हुई प्रतीत हो रही थी। पर्वतों की गुफाओं, छतों, प्राचीरों और नगर के द्वारों सहित सारी लंका जल गई; परन्तु सीता को कोई हानि नहीं हुई। यह हमारे लिए बड़ी विचित्र और आश्चर्यजनक बात है।’॥31-32॥
‘The entire Lanka, filled with the demons, women, children and old people who had fled from their homes, seemed to be screaming and filled with the noise of the people. The entire Lanka, including the mountain caves, terraces, ramparts and city gates, was burnt; but Sita was not harmed. This is a very strange and surprising thing for us.’॥ 31-32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥