Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.55.3: जो महात्मा अपनी बुद्धि से दूसरों के क्रोध को उसी प्रकार शांत कर देते हैं, जैसे साधारण लोग जल से प्रज्वलित अग्नि को बुझा देते हैं, वे ही इस संसार में धन्य हैं॥3॥ | ramayan सर्ग 5.55: सीताजी के लिये हनुमान् जी की चिन्ता और उसका निवारण । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धन्या: खलु महात्मानो ये बुद्ध्या कोपमुत्थितम्।
निरुन्धन्ति महात्मानो दीप्तमग्निमिवाम्भसा॥ ३॥
अनुवाद
जो महात्मा अपनी बुद्धि से दूसरों के क्रोध को उसी प्रकार शांत कर देते हैं, जैसे साधारण लोग जल से प्रज्वलित अग्नि को बुझा देते हैं, वे ही इस संसार में धन्य हैं॥3॥
Those great souls who by their wisdom put down the anger of others, like ordinary people put off a blazing fire by using water, are the only blessed people in this world.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥