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तपसा सत्यवाक्येन अनन्यत्वाच्च भर्तरि।
असौ विनिर्दहेदग्निं न तामग्नि: प्रधक्ष्यति॥ २८॥
अनुवाद
वे सोचने लगे - 'केवल आर्या सीता ही अपने तप, सत्यभाषण और अनन्य पतिभक्ति के कारण अग्नि को जला सकती हैं, अग्नि उन्हें जला नहीं सकती'॥28॥
They started thinking - 'Only Arya Sita can burn the fire due to her penance, truthful speech and undivided devotion to her husband, fire cannot burn her'. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥