Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.55.11: लंका का कोई भाग ऐसा नहीं है जहाँ आग न लगी हो। मैंने पूरी नगरी को नष्ट कर दिया है, अतः यह स्पष्ट है कि जानकी का नाश हो गया है।'   |   ramayan सर्ग 5.55: सीताजी के लिये हनुमान् जी की चिन्ता और उसका निवारण   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 55: सीताजी के लिये हनुमान् जी की चिन्ता और उसका निवारण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.55.11 
विनष्टा जानकी व्यक्तं न ह्यदग्ध: प्रदृश्यते।
लङ्काया: कश्चिदुद्देश: सर्वा भस्मीकृता पुरी॥ ११॥
 
 
अनुवाद
लंका का कोई भाग ऐसा नहीं है जहाँ आग न लगी हो। मैंने पूरी नगरी को नष्ट कर दिया है, अतः यह स्पष्ट है कि जानकी का नाश हो गया है।'
 
There is no part of Lanka where there is no fire. I have destroyed the whole city, so it is self-evident that Janaki has perished.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)