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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 54: लङ्कापुरी का दहन और राक्षसों का विलाप  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.54.7 
गृहाद् गृहं राक्षसानामुद्यानानि च वानर:।
वीक्षमाणो ह्यसंत्रस्त: प्रासादांश्च चचार स:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे वीर वानर बिना किसी भय के राक्षसों के एक घर से दूसरे घर तक घूमते रहे और उनके उद्यानों तथा राजमहलों का निरीक्षण करते रहे।
 
Those brave monkeys roamed from one house of the demons to another without any fear, viewing the gardens and royal palaces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)