Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.54.44: महात्मा हनुमान्जी बहुत से राक्षसों का वध करके और असंख्य वृक्षों से युक्त प्रमदवन को नष्ट करके रात्रिवासियों के घरों में आग लगा दी और मन में श्री रामचन्द्रजी का स्मरण करने लगे॥44॥ | ramayan सर्ग 5.54: लङ्कापुरी का दहन और राक्षसों का विलाप । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स राक्षसांस्तान् सुबहूंश्च हत्वा
वनं च भङ्क्त्वा बहुपादपं तत्।
विसृज्य रक्षोभवनेषु चाग्निं
जगाम रामं मनसा महात्मा॥ ४४॥
अनुवाद
महात्मा हनुमान्जी बहुत से राक्षसों का वध करके और असंख्य वृक्षों से युक्त प्रमदवन को नष्ट करके रात्रिवासियों के घरों में आग लगा दी और मन में श्री रामचन्द्रजी का स्मरण करने लगे॥44॥
Mahatma Hanuman, after killing many demons and destroying Pramadavan full of innumerable trees, set fire to the houses of the night dwellers and started remembering Shri Ramchandraji in his mind. 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥