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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 54: लङ्कापुरी का दहन और राक्षसों का विलाप  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.54.41 
हुताशनज्वालसमावृता सा
हतप्रवीरा परिवृत्तयोधा।
हनूमत: क्रोधबलाभिभूता
बभूव शापोपहतेव लङ्का॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हनुमान के क्रोध से लपटें उठती हुई लंका आग की लपटों में घिर गई। उसके सबसे प्रमुख योद्धा मारे गए। सभी योद्धा तितर-बितर और व्याकुल हो गए। ऐसा लग रहा था जैसे यह नगर किसी श्राप से ग्रस्त हो।
 
Lanka, overwhelmed by Hanuman's anger, was engulfed in flames. Its most prominent warriors were killed. All the warriors were scattered and distraught. Thus the city appeared to be afflicted by a curse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)