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ramayan 5.54.40: उन्होंने कहा, ‘हे मेरे बप्पा! हाय बेटा! हाँ स्वामिनी! हा सखा! हा प्राणनाथ! हमारे सब पुण्य नष्ट हो गए।’ नाना प्रकार से विलाप करते हुए दैत्यों ने अत्यन्त भयंकर और भयंकर क्रन्दन किया। 40॥   |   ramayan सर्ग 5.54: लङ्कापुरी का दहन और राक्षसों का विलाप   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 54: लङ्कापुरी का दहन और राक्षसों का विलाप  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.54.40 
हा तात हा पुत्रक कान्त मित्र
हा जीवितेशाङ्ग हतं सुपुण्यम्।
रक्षोभिरेवं बहुधा ब्रुवद्भि:
शब्द: कृतो घोरतर: सुभीम:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, ‘हे मेरे बप्पा! हाय बेटा! हाँ स्वामिनी! हा सखा! हा प्राणनाथ! हमारे सब पुण्य नष्ट हो गए।’ नाना प्रकार से विलाप करते हुए दैत्यों ने अत्यन्त भयंकर और भयंकर क्रन्दन किया। 40॥
 
He said, 'Oh my Bappa! Hi son! Yes mistress! Ha friend! Ha Prannath! All our virtues have been destroyed.' While lamenting in various ways, the demons made very terrible and terrible cries. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)