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ramayan 5.53.25-26h: अपने हरण के समान इस क्रूर एवं दुःखद कथा को सुनकर विदेहनन्दिनी सीता अत्यन्त दुःखी हो गईं और मन ही मन अग्निदेव की प्रार्थना करने लगीं।   |   ramayan सर्ग 5.53: राक्षसों का हनुमान जी की पूँछ में आग लगाकर उन्हें नगर में घुमाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.53.25-26h 
श्रुत्वा तद् वचनं क्रूरमात्मापहरणोपमम्॥ २५॥
वैदेही शोकसंतप्ता हुताशनमुपागमत्।
 
 
अनुवाद
अपने हरण के समान इस क्रूर एवं दुःखद कथा को सुनकर विदेहनन्दिनी सीता अत्यन्त दुःखी हो गईं और मन ही मन अग्निदेव की प्रार्थना करने लगीं।
 
Hearing this cruel and painful story, just like her own abduction, Videhanandini Sita became extremely sad and started praying to Agnidev in her heart. 25 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)