श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.52.9 
तस्मात् प्रसीद शत्रुघ्न राक्षसेन्द्र दुरासद।
युक्तायुक्तं विनिश्चित्य दूतदण्डो विधीयताम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अतः हे शत्रुओं का नाश करने वाले अजेय दैत्यराज! आप प्रसन्न होकर उचित-अनुचित का विचार करके दूत के लिए उचित दण्ड का निश्चय करें। ॥9॥
 
"Therefore, O invincible demon king who destroys his enemies, please be pleased and after considering what is right and wrong, decide on a punishment that is appropriate for the messenger." ॥9॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd