Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.52.7-8: आप धर्म के ज्ञाता, परोपकार में विश्वास रखने वाले, राजधर्म के विशेषज्ञ, भले-बुरे के ज्ञाता और परहित के ज्ञाता हैं। यदि आप जैसे विद्वान् भी क्रोध से ग्रस्त हो जाएँ, तो सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करना भी श्रम ही होगा॥ 7-8॥ | ramayan सर्ग 5.52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च राजधर्मविशारद:।
परावरज्ञो भूतानां त्वमेव परमार्थवित्॥ ७॥
गृह्यन्ते यदि रोषेण त्वादृशोऽपि विचक्षणा:।
तत: शास्त्रविपश्चित्त्वं श्रम एव हि केवलम्॥ ८॥
अनुवाद
आप धर्म के ज्ञाता, परोपकार में विश्वास रखने वाले, राजधर्म के विशेषज्ञ, भले-बुरे के ज्ञाता और परहित के ज्ञाता हैं। यदि आप जैसे विद्वान् भी क्रोध से ग्रस्त हो जाएँ, तो सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करना भी श्रम ही होगा॥ 7-8॥
‘You are a knower of Dharma, a believer of benevolence, an expert in Rajdharma, a knower of good and bad and a knower of the welfare of others. If even a scholar like you is overcome by anger, then acquiring the knowledge of all the scriptures will be a mere labour.॥ 7-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥