श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.52.4 
निश्चितार्थस्तत: साम्ना पूज्यं शत्रुजिदग्रजम्।
उवाच हितमत्यर्थं वाक्यं वाक्यविशारद:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
निर्णय हो जाने पर वार्ताकार विभीषण ने शान्त भाव से अपने पूज्य बड़े भाई शत्रुओं को जीतने वाले रावण से ये हितकर वचन कहे : 4॥
 
After the decision was taken, conversationalist Vibhishana calmly said these beneficial words to his respected elder brother Ravana, the conqueror of enemies: 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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