| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना » श्लोक 26-27 |
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| | | | श्लोक 5.52.26-27  | हिताश्च शूराश्च समाहिताश्च
कुलेषु जाताश्च महागुणेषु।
मनस्विन: शस्त्रभृतां वरिष्ठा:
कोपप्रशस्ता: सुभृताश्च योधा:॥ २६॥
तदेकदेशेन बलस्य तावत्
केचित् तवादेशकृतोऽद्य यान्तु।
तौ राजपुत्रावुपगृह्य मूढौ
परेषु ते भावयितुं प्रभावम्॥ २७॥ | | | | | | अनुवाद | | मेरा विचार है कि वियोग के शोक से व्याकुल उन राजकुमारों को पकड़ने के लिए तथा शत्रुओं पर प्रभाव और प्रभुत्व स्थापित करने के लिए आपकी अनुमति से कुछ योद्धा एक छोटी सेना लेकर यहाँ से प्रस्थान करें, जो शुभचिंतक, वीर, सतर्क, महान गुणों वाले, कुलीन कुल में उत्पन्न, बुद्धिमान, शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, क्रोध और उत्साह के लिए प्रशंसित हों तथा जिनका पालन-पोषण उच्च वेतन देकर किया गया हो।॥26-27॥ | | | | My opinion is that in order to capture those princes who are distraught with the grief of separation and to create an influence and dominance over the enemies, with your permission some warriors should travel from here with a small army, who are well wishers, valiant, cautious, of great qualities, born in a noble family, intelligent, the best among the wielders of weapons, praised for their fury and zeal and who have been brought up well by giving them high salaries.'॥ 26-27॥ | | ✨ ai-generated | | |
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