श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.52.20 
न चाप्यस्य कपेर्घाते कंचित् पश्याम्यहं गुणम्।
तेष्वयं पात्यतां दण्डो यैरयं प्रेषित: कपि:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
"मुझे इस बंदर को मारने में कोई फ़ायदा नहीं दिखता। इसे भेजने वालों को मौत की सज़ा मिलनी चाहिए।"
 
‘I don't see any benefit in killing this monkey. Those who sent him should be given this death penalty.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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