Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.52.18: पराक्रम और उत्साह से युक्त, महाबली देवताओं और दानवों के लिए भी आपको परास्त करना अत्यंत कठिन है। आप अपार पराक्रमी हैं। आपने अनेक युद्धों में देवताओं और राजाओं को बार-बार परास्त किया है॥18॥   |   ramayan सर्ग 5.52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.52.18 
पराक्रमोत्साहमनस्विनां च
सुरासुराणामपि दुर्जयेन।
त्वयाप्रमेयेण सुरेन्द्रसङ्घा
जिताश्च युद्धेष्वसकृन्नरेन्द्रा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पराक्रम और उत्साह से युक्त, महाबली देवताओं और दानवों के लिए भी आपको परास्त करना अत्यंत कठिन है। आप अपार पराक्रमी हैं। आपने अनेक युद्धों में देवताओं और राजाओं को बार-बार परास्त किया है॥18॥
 
‘It is very difficult for even the strong-willed gods and demons who are full of valour and enthusiasm to defeat you. You are immeasurably powerful. You have repeatedly defeated the gods and kings in many wars.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)