Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.52.14: इसमें संदेह नहीं कि वह बहुत बड़ा शत्रु है; क्योंकि उसने ऐसा अपराध किया है जिसकी तुलना नहीं की जा सकती; फिर भी पुण्यात्मा लोग दूत को मारना उचित नहीं समझते। दूत के लिए और भी बहुत प्रकार के दण्ड देखे गए हैं॥14॥ | ramayan सर्ग 5.52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असंशयं शत्रुरयं प्रवृद्ध:
कृतं ह्यनेनाप्रियमप्रमेयम्।
न दूतवध्यां प्रवदन्ति सन्तो
दूतस्य दृष्टा बहवो हि दण्डा:॥ १४॥
अनुवाद
इसमें संदेह नहीं कि वह बहुत बड़ा शत्रु है; क्योंकि उसने ऐसा अपराध किया है जिसकी तुलना नहीं की जा सकती; फिर भी पुण्यात्मा लोग दूत को मारना उचित नहीं समझते। दूत के लिए और भी बहुत प्रकार के दण्ड देखे गए हैं॥14॥
‘There is no doubt that he is a very big enemy; because he has committed a crime which has no comparison, yet the virtuous people do not consider it right to kill a messenger. Many other types of punishments have been seen for a messenger.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥