श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.52.11 
न पापानां वधे पापं विद्यते शत्रुसूदन।
तस्मादिमं वधिष्यामि वानरं पापकारिणम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन! पापियों को मारने में कोई पाप नहीं है। इस वानर ने बगीचे को नष्ट करके तथा राक्षसों को मारकर पाप किया है। अतः मैं इसका अवश्य वध करूँगा।॥11॥
 
Shatrusudan! There is no sin in killing sinners. This monkey has committed a sin by destroying the garden and killing the demons. Therefore, I will definitely kill him.'॥ 11॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd