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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.51.42 
सर्वलोकेश्वरस्येह कृत्वा विप्रियमीदृशम्।
रामस्य राजसिंहस्य दुर्लभं तव जीवितम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
समस्त लोकों के स्वामी राजसिंह श्री राम के प्रति ऐसा महान अपराध करके तुम्हारा जीवित रहना कठिन है।
 
It is difficult for you to survive by committing such a great crime against the Lord of all the worlds, Raj Singh Shri Ram.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)