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ramayan 5.51.4: हाल ही में दशरथ नाम के एक राजा हुए, जो अपने पिता के समान प्रजा के हितैषी, इन्द्र के समान तेजस्वी और रथ, हाथी, घोड़े आदि से संपन्न थे॥4॥   |   ramayan सर्ग 5.51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.51.4 
राजा दशरथो नाम रथकुञ्जरवाजिमान्।
पितेव बन्धुर्लोकस्य सुरेश्वरसमद्युति:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हाल ही में दशरथ नाम के एक राजा हुए, जो अपने पिता के समान प्रजा के हितैषी, इन्द्र के समान तेजस्वी और रथ, हाथी, घोड़े आदि से संपन्न थे॥4॥
 
Recently a king named Dasharathan was born, who like his father was a well-wisher of his subjects, as illustrious as Indra and was blessed with chariots, elephants and horses etc.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)