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ramayan 5.51.32: श्री रामजी ने वानरों और भालुओं के सामने प्रतिज्ञा की है कि वे स्वयं उन शत्रुओं का वध करेंगे जिन्होंने सीताजी का अपमान किया है॥ 32॥   |   ramayan सर्ग 5.51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.51.32 
रामेण हि प्रतिज्ञातं हर्यृक्षगणसंनिधौ।
उत्सादनममित्राणां सीता यैस्तु प्रधर्षिता॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी ने वानरों और भालुओं के सामने प्रतिज्ञा की है कि वे स्वयं उन शत्रुओं का वध करेंगे जिन्होंने सीताजी का अपमान किया है॥ 32॥
 
Sri Rama has vowed in front of the monkeys and bears that he will himself kill those enemies who have insulted Sita.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)