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जनस्थानवधं बुद्ध्वा वालिनश्च वधं तथा।
रामसुग्रीवसख्यं च बुद्ध्यस्व हितमात्मन:॥ ३०॥
अनुवाद
जनस्थान के राक्षसों का वध, बालि का वध तथा श्री राम-सुग्रीव की मित्रता - इन तीन कार्यों को अच्छी तरह समझ लो। फिर अपने कल्याण के विषय में सोचो॥30॥
‘Understand these three tasks well: the killing of the demons of Janasthan, the killing of Vali and the friendship between Shri Ram and Sugreeva. Then think about your own welfare.॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥