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ramayan 5.51.22: मैंने इन देवी सीता का दर्शन किया है। यहाँ मुझे वह सब मिल गया है जो दुर्लभ था। इसके बाद जो भी कार्य शेष है, उसकी सिद्धि के लिए श्री रघुनाथजी ही एकमात्र माध्यम हैं॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 5.51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.51.22 
दृष्टा हीयं मया देवी लब्धं यदिह दुर्लभम्।
उत्तरं कर्म यच्छेषं निमित्तं तत्र राघव:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मैंने इन देवी सीता का दर्शन किया है। यहाँ मुझे वह सब मिल गया है जो दुर्लभ था। इसके बाद जो भी कार्य शेष है, उसकी सिद्धि के लिए श्री रघुनाथजी ही एकमात्र माध्यम हैं॥ 22॥
 
I have seen this goddess Sita. I have found here what was rare. After this, whatever task is remaining, Shri Raghunathji is the only medium for its accomplishment.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)