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ramayan 5.51.2: 'दैत्यराज! मैं सुग्रीव का संदेश लेकर यहाँ आया हूँ। वानरराज सुग्रीव आपके भाई हैं। इसीलिए उन्होंने आपका कुशल-क्षेम पूछा है॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 5.51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.51.2 
अहं सुग्रीवसंदेशादिह प्राप्तस्तवान्तिके।
राक्षसेश हरीशस्त्वां भ्राता कुशलमब्रवीत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
'दैत्यराज! मैं सुग्रीव का संदेश लेकर यहाँ आया हूँ। वानरराज सुग्रीव आपके भाई हैं। इसीलिए उन्होंने आपका कुशल-क्षेम पूछा है॥ 2॥
 
‘King of demons! I have come here with a message from Sugreeva. King of monkeys Sugreeva is your brother. That is why he has asked about your well-being.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)