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श्लोक  5.50.7 
रावणस्य वच: श्रुत्वा प्रहस्तो वाक्यमब्रवीत्।
समाश्वसिहि भद्रं ते न भी: कार्या त्वया कपे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
रावण की बातें सुनकर प्रहस्त ने हनुमान से कहा - "वानर! घबराओ मत, धैर्य रखो। तुम्हारा कल्याण हो। तुम्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।"
 
On hearing Ravana's words, Prahast said to Hanuman - 'Monkey! Do not panic, be patient. May you be blessed. You need not be afraid.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)