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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 50: रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लङ्का में आने का कारण पुछवाना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना
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श्लोक 7
श्लोक
5.50.7
रावणस्य वच: श्रुत्वा प्रहस्तो वाक्यमब्रवीत्।
समाश्वसिहि भद्रं ते न भी: कार्या त्वया कपे॥ ७॥
अनुवाद
रावण की बातें सुनकर प्रहस्त ने हनुमान से कहा - "वानर! घबराओ मत, धैर्य रखो। तुम्हारा कल्याण हो। तुम्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।"
On hearing Ravana's words, Prahast said to Hanuman - 'Monkey! Do not panic, be patient. May you be blessed. You need not be afraid.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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